मुर्गे की लड़ाई में करोड़ों का दांव, एक जीत ने बनाया ‘मुर्गा करोड़पति’

आंध्र प्रदेश | आंध्र प्रदेश के ताडेपल्लीगुडेम कस्बे में संक्रांति पर्व के दौरान आयोजित मुर्गे की लड़ाई में एक व्यक्ति की किस्मत रातोंरात बदल गई। राजमुंद्री निवासी रमेश नामक व्यक्ति ने इस पारंपरिक लेकिन प्रतिबंधित खेल में करोड़ों रुपये का दांव जीतकर सबको चौंका दिया। रमेश और गुडीवाडा प्रभाकर ने अपने-अपने प्रशिक्षित मुर्गों पर भारी रकम लगाई थी, जिनके पैरों में धारदार चाकू बांधे गए थे। मुकाबले में रमेश का मुर्गा विजयी रहा और उसे यह बड़ी जीत हासिल हुई।

स्थानीय टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित वीडियो में रमेश और उसके साथी इस जीत का जश्न मनाते नजर आए। बताया जा रहा है कि यह संक्रांति सीजन में अब तक लगाया गया सबसे बड़ा दांव है। रमेश ने बताया कि उसने अपने विशेष नस्ल के मुर्गे को छह महीने तक सूखे मेवे खिलाकर खास तौर पर तैयार किया था, ताकि वह लड़ाई के दौरान पूरी तरह मजबूत और फुर्तीला रहे।

प्रतिबंधों के बावजूद धड़ल्ले से हुई मुर्गा लड़ाई

गौरतलब है कि गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को लगातार दूसरे दिन आंध्र प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर मुर्गा लड़ाई का आयोजन किया गया। अदालतों के प्रतिबंध और प्रशासन की चेतावनियों के बावजूद इन आयोजनों पर कोई खास असर नहीं दिखा। पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा, एलुरु, पोलावरम और कृष्णा जिलों में विशेष अखाड़े बनाकर मुर्गा लड़ाई और जुए की गतिविधियां संचालित की गईं। आयोजकों को कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी प्राप्त था।

तीसरे दिन भी जारी रखने की तैयारी

पुलिस और जिला प्रशासन की सख्त चेतावनियों के बावजूद आयोजकों ने शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को तीसरे दिन भी मुर्गा लड़ाई जारी रखने की तैयारियां कर ली हैं। इन लड़ाइयों में प्रशिक्षित मुर्गों के पैरों में छोटी-छोटी चाकू बांधी जाती हैं, जिससे मुकाबले के दौरान गंभीर चोटें लगती हैं और कई मामलों में किसी एक मुर्गे की मौत हो जाती है। दर्शक भारी दांव लगाकर उत्साह के साथ इन लड़ाइयों का आनंद लेते देखे गए।

उल्लेखनीय है कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और आंध्र प्रदेश जुआ अधिनियम के तहत मुर्गा लड़ाई और उससे जुड़ा जुआ पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद संक्रांति के अवसर पर यह गतिविधियां खुलेआम जारी हैं।

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